नई रिसर्च से पता चला है कि गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस बीमारी के जोखिम को बढ़ा देता है। यह खुलासा चिकित्सा जगत में हलचल मचा रहा है।
जीबीएस संक्रमण नवजातों के लिए बड़ा खतरा है। जन्म के पहले सप्ताह में ही यह जानलेवा साबित हो सकता है। पारंपरिक रूप से लेबर के दौरान एंटीबायोटिक दिए जाते हैं, लेकिन अब प्रेग्नेंसी के दौरान पहले से लिए गए एंटीबायोटिक्स पर सवाल उठे हैं।
5,000 से अधिक केस स्टडी में पाया गया कि लेट प्रेग्नेंसी में एंटीबायोटिक्स लेने वाली माताओं के बच्चे अधिक प्रभावित हुए। ब्रॉड-स्पेक्ट्रम दवाओं ने योनि के अच्छे बैक्टीरिया को खत्म कर जीबीएस को जगह दी।
डॉक्टरों को सलाह दी जा रही है कि रूटीन प्रिस्क्रिप्शन पर पुनर्विचार करें। यूटीआई या अन्य मामलों में वैकल्पिक इलाज अपनाएं। सीडीसी जैसी संस्थाएं नई गाइडलाइंस बना रही हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए संदेश साफ है- दवा लेने से पहले पूरी जानकारी लें। माइक्रोबायोम संतुलन भविष्य की सेहत तय करता है। वैक्सीन डेवलपमेंट के साथ यह अध्ययन आशा जगाता है कि जीबीएस को पूरी तरह रोका जा सकेगा। जागरूकता ही बचाव की पहली सीढ़ी है।