केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव की नवीडिया के अधिकारियों के साथ बैठक भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकती है। फोकस है देश में जीपीयू उत्पादन इकाइयां स्थापित करने पर, जो एआई और कंप्यूटिंग क्षेत्र को नई गति देगा।
उच्च स्तरीय वार्ता में वैष्णव ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन, 10 अरब डॉलर कोष और नीतिगत समर्थन की रूपरेखा पेश की। गेमिंग, एआई ट्रेनिंग और सुपरकंप्यूटिंग में अग्रणी नवीडिया ने प्रस्ताव में रुचि दिखाई।
यह ‘मेक इन इंडिया’ का विस्तार है। स्मार्टफोन से ईवी तक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण बढ़ा, लेकिन उन्नत चिप्स की कमी थी। डेटा विस्फोट से जीपीयू मांग बढ़ रही है।
मंत्री ने क्लीनरूम, आरएंडडी सेंटर और कौशल विकास योजनाओं का खाका रखा। गुजरात का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और यूपी का आगामी फैब पार्क आगे हैं। वैष्णव ने भू-राजनीतिक पहलू पर बल दिया—आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरी के बीच भारत का लोकतंत्र और प्रतिभा आकर्षक है।
हाल के माइक्रॉन प्लांट जैसे सफल उदाहरण प्रेरणा हैं। बिजली उन्नयन और जल स्रोत जरूरी हैं। सफलता पर जीपीयू आपूर्ति श्रृंखला बनेगी, भारत नवीडिया का रणनीतिक साझीदार बनेगा।
वैष्णव की पहल वैश्विक तकनीकी कूटनीति में भारत की बढ़ती ताकत दिखाती है। यह न केवल विनिर्माण, बल्कि आर्थिक उछाल लाएगा।