श्रीनगर से सनसनीखेज खबर आ रही है। प्रमुख कश्मीरी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन पर घरेलू नजरबंदी का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया के माध्यम से फैमिली ने उनका बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि कई दिनों से उन्हें घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही।
‘यह गैरकानूनी कार्रवाई है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है,’ मीरवाइज ने कहा। उन्होंने जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज न पढ़ा पाने का दुख व्यक्त किया। सुरक्षाबलों की भारी मौजूदगी के कारण उनके समर्थक भी संपर्क नहीं कर पा रहे।
यह विवाद तब पैदा हुआ जब कश्मीर घाटी धार्मिक आयोजनों के दौर से गुजर रही है। खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि यह सुरक्षात्मक उपाय है। विपक्षी दल इसे मौलिक अधिकारों का हनन बता रहे हैं।
मीरवाइज की नजरबंदी का इतिहास लंबा है। वे मध्यमार्गी अलगाववादी नेता के रूप में जाने जाते हैं। इस घटना से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। प्रशासन को अब स्पष्ट बयान देने की उम्मीद है।
कश्मीर में शांति प्रक्रिया के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में स्थिति पर सबकी नजरें टिकी हैं।