मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण की ओर प्रस्थान करता है, और बिहार का देव सूर्य मंदिर इस संक्रमण का साक्षी बनता है। यहां सूर्य कुंड का स्नान पापों का सर्वनाश कर देता है, भक्तों को शुद्धता का वरदान देता है।
मंदिर का निर्माण सूर्य वंश के राजाओं ने कराया था। कुंड को सूर्य की कृपा प्राप्त है, जो संक्रांति पर अपने चरम पर होता है। प्राचीन ग्रंथों में इसका वर्णन पाप नाशक तीर्थ के रूप में मिलता है।
सुबह की आरती के बाद भक्तजनों की कतार लग जाती है। ‘ओम सूर्याय नमः’ का जाप करते हुए वे कुंड में डुबकी लगाते हैं। प्रत्येक डुबकी से अशुद्धियां दूर होती जाती हैं। स्थानीय पंडितों के अनुसार, कई भक्तों को चमत्कारिक लाभ हुआ—बांझ महिलाएं मां बनीं, व्यसनी छुड़वा बैठे।
कुंड के चारों ओर कमल पुष्प खिले रहते हैं, मछलियां तैरती रहती हैं—यह सब सूर्य कृपा का प्रतीक है। मंदिर परिसर में उत्कृष्ट नक्काशीदार दीवारें हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रयास भी सराहनीय हैं।
इस पर्व पर देव सूर्य मंदिर की यात्रा अनिवार्य है। ट्रेन या बस से पहुंच आसान है। आस्था और आनंद से भरा यह स्नान जीवन को नई दिशा देगा। जय सूर्य देव!