दिल्ली दंगों की साजिश के आरोप में जेल में बंद शरजील इमाम के वकील ने अदालत में पेश दलीलों से अभियोजन के तर्कों को चुनौती दी। उन्होंने दावा किया कि इमाम के सभी भाषण अहिंसा पर केंद्रित थे, हिंसा पर नहीं।
सुनवाई के दौरान वकील ने दिसंबर 2019-जनवरी 2020 के वीडियो और ट्रांसक्रिप्ट पेश किए। ‘इमाम ने प्रदर्शनकारियों से पत्थरबाजी या तोड़फोड़ से परहेज करने को कहा। यह गांधीवादी अहिंसा का आह्वान था,’ उन्होंने स्पष्ट किया।
दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ इमाम को जाफराबाद और करावल नगर जैसे दंगों का सूत्रधार बता रहा है, लेकिन वकील ने सबूतों की कमी पर सवाल उठाए। दंगों में भारी तबाही हुई—दुकानें जलीं, घर ध्वस्त हुए।
यह केस भारत के राजनीतिक माहौल में विरोध प्रदर्शनों की सीमाओं को परिभाषित कर सकता है। जमानत पर फैसला आने वाला है, जो पूर्व जेएनयू छात्र इमाम के भाग्य का फैसला करेगा। मानवाधिकार संगठन लंबी हिरासत की निंदा कर रहे हैं।