मूत्र की जांच से किडनी की स्थिति का पता चल जाता है। रंग बदलना, कम होना या बदबू आना गंभीर समस्या का इशारा है। नजरअंदाज करने से डायलिसिस तक बात पहुंच सकती है।
रात में बार-बार पेशाब आना (नॉक्टूरिया) किडनी की कमजोरी दिखाता है। बादाम तेल जैसा रंग बाइलरुबिन की अधिकता बताता है। मीठी या अमोनिया जैसी गंध डायबिटीज या संक्रमण की ओर ले जाती है। प्रोटीन वाला झागदार मूत्र अल्ब्युमिनुरिया का संकेत है।
भारत में करोड़ों लोग सीकेडी से प्रभावित हैं। धूम्रपान, मोटापा और दवाओं का अधिक सेवन खतरा बढ़ाते हैं। रोकथाम के उपाय: संतुलित आहार, व्यायाम, ब्लड प्रेशर चेक। जीएफआर टेस्ट से स्टेज पता चलता है। घर पर रंग-मात्रा नोट करें। डॉक्टर की सलाह लें—बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है।