उदय शंकर और अमला शंकर की बेटी ममता शंकर का जीवन कला का उत्सव है। घुंघरुओं की आवाज और संगीत के स्वरों के बीच उनका बचपन बीता, जहां नृत्य रोजमर्रा का हिस्सा था। इस माहौल ने उन्हें कथक की दुनिया में महारथ हासिल करने की प्रेरणा दी।
उनकी ट्रेनिंग सख्त और विविध रही। पारंपरिक कथक के साथ-साथ पिता की फ्यूजन शैली ने उन्हें अनोखा बनाया। ममता शंकर डांस ग्रुप ने विश्व पटल पर भारतीय नृत्य को नई ऊंचाइयां दीं। उनके कोरियोग्राफी में भाव और ताल का कमाल देखने लायक है।
फिल्मी दुनिया में एंट्री ने उनकी पहचान को व्यापक बनाया। एक्टिंग, कोरियोग्राफी और डायरेक्शन में हाथ आजमाया। ‘अट्टहास’ जैसी फिल्में उनके टैलेंट की गवाही देती हैं।
पुरस्कारों से नवाजी गईं ममता आज भी वर्कशॉप और परफॉर्मेंस से सक्रिय हैं। उनकी अकादमी नौजवानों को कला का सच्चा स्वरूप सिखा रही है। ममता शंकर सिद्ध करती हैं कि कला की राह में मेहनत और जुनून सबसे बड़ा हथियार हैं।