बिमल रॉय भारतीय फिल्म जगत के उन दुर्लभ निर्देशकों में शुमार हैं जिन्होंने महिलाओं की कहानियों को प्रमुखता दी। उनकी हर फिल्म स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता के संदेश से ओतप्रोत रही। ‘परिणीता’, ‘बिराज बहू’ और अन्य रचनाओं में उन्होंने नारी के अंदर छिपी ताकत को उजागर किया। colonial काल से आजादी के बाद के दौर में बिमल रॉय की फिल्में समाज को आईना दिखाती थीं। वे महिलाओं को केवल सहनशील नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली शक्तिशाली व्यक्तित्व के रूप में दिखाते थे। उनकी निर्देशन शैली भावुकता और यथार्थवाद का अनोखा मिश्रण थी। आज भी उनकी फिल्में नारीवाद की मिसाल हैं और दर्शकों को गहराई से प्रभावित करती हैं। बिमल रॉय का सिनेमा महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक बना रहेगा।
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