नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ स्थिति में पहुँच गई है, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों और वादियों को स्वास्थ्य जोखिमों को ध्यान में रखते हुए वर्चुअल सुनवाई का विकल्प चुनने की सलाह दी है। वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरे के मद्देनजर, सर्वोच्च न्यायालय ने अदालतों में हाइब्रिड सुनवाई प्रणाली का अधिक से अधिक उपयोग करने का सुझाव दिया है।
रविवार को, शीर्ष अदालत ने एक आधिकारिक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि वर्तमान मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए, माननीय मुख्य न्यायाधीश ने बार के सदस्यों और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने वाले पक्षकारों को हाइब्रिड मोड का उपयोग करने की सलाह दी है। इसका अर्थ है कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी सुनवाई में भाग ले सकते हैं। यह निर्णय विशेष रूप से तब लिया गया है जब दिल्ली की हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच गई है और लोगों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।
**दिल्ली का AQI इस सर्दी का सबसे खराब**
रविवार के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 461 दर्ज किया गया। यह न केवल इस सर्दी का सबसे प्रदूषित दिन है, बल्कि दिसंबर माह के इतिहास में दूसरा सबसे खराब AQI भी है। वैज्ञानिक बताते हैं कि धीमी हवाएं और ठंडे तापमान के कारण प्रदूषित कण हवा में अधिक समय तक बने रह रहे हैं। वज़ीरपुर में AQI 500 तक पहुँच गया, जो कि मापन की ऊपरी सीमा है। अधिकांश निगरानी स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में है।
**स्वास्थ्य पर प्रदूषण का प्रभाव**
स्वास्थ्य विशेषज्ञ दिल्ली की हवा को ‘जानलेवा’ बता रहे हैं। उनका कहना है कि इतने उच्च AQI स्तर पर, बाहर की शारीरिक गतिविधियाँ, विशेष रूप से सुबह के समय, बहुत जोखिम भरी हो सकती हैं। PM2.5 जैसे बारीक कण फेफड़ों में गहराई तक जाकर गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग जब तक बहुत ज़रूरी न हो, बाहर न निकलें और यदि बाहर जाना पड़े तो उच्च गुणवत्ता वाले मास्क का प्रयोग अवश्य करें। घर के अंदर रहने और ताज़े फलों का सेवन करने से शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिल सकती है।
**GRAP के तहत कड़े कदम**
बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे चरण को लागू कर दिया है। इसके तहत दिल्ली-NCR में निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर रोक लगा दी गई है। पहले से ही GRAP के तीसरे चरण के तहत कई पाबंदियाँ लागू थीं।
