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    Home»India»मराठा आरक्षण विवाद: ईडब्ल्यूएस कोटे पर जोर, ओबीसी से अलग राह?
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    मराठा आरक्षण विवाद: ईडब्ल्यूएस कोटे पर जोर, ओबीसी से अलग राह?

    Indian SamacharBy Indian SamacharAugust 31, 20252 Mins Read
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    महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ है, जिसमें मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल और 1 सितंबर से पानी त्यागने की घोषणा शामिल है। इस मुद्दे पर मंत्रियों चंद्रकांत पाटिल और नितेश राणे ने एक अलग दृष्टिकोण पेश किया है। उनका मानना है कि मराठा समुदाय को ओबीसी के बजाय ईडब्ल्यूएस कोटे का लाभ उठाना चाहिए और इसे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

    नितेश राणे ने एनसीपी (सपा) विधायक रोहित पवार पर जरांगे के विरोध प्रदर्शन के लिए फंडिंग का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी नेता केशव उपाध्याय ने महाविकास अघाड़ी (एमवीए) पर मराठा आरक्षण के मुद्दे पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया।

    मनोज जरांगे पाटिल, मराठाओं के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं और उन्हें कुनबी के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण प्राप्त कर सकें।

    मंत्री नीतेश राणे ने स्पष्ट किया कि जरांगे की ओबीसी में शामिल होने की मांग संभव नहीं है, लेकिन मराठवाड़ा तक सीमित मांगों पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मराठाओं को ईडब्ल्यूएस के माध्यम से आरक्षण मिल सकता है, जिसके तहत सरकार पहले ही शिक्षा और नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

    चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि मराठाओं को छुआछूत का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उन्होंने बताया कि कृषि से आय कम होने के कारण मराठा परिवार शिक्षा और बेहतर जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा ईडब्ल्यूएस के तहत आरक्षण, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है, इस दिशा में एक समाधान प्रदान करता है। ईडब्ल्यूएस की शुरुआत 2019 में की गई थी, जिसका उद्देश्य सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रदान करना है। इसका लाभ 8 लाख से कम आय वाले परिवारों को मिलता है।

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